E25,E30 की गिनती ठीक से याद नहीं, पढ़ा दिया E85 – सत्यदीप त्रिवेदी

मशहूर लेखक और हिंदी साहित्य के ज्ञाता सत्यदीप त्रिवेदी ने अपने एक लेख मे लिखा कि भाइयों-बहनों, आपको बताते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि विश्वगुरु के पेट में बड़े धूम के साथ E85 का ईंधन झोंक दिया गया है। हमारी जनता को अभी E25, E30 की गिनती ठीक से याद भी नहीं हो पाई थी कि हमें E85 का पहाड़ा पढ़ने बिठा दिया गया है।

गौरतलब है कि हम भारत के लोग किसी क्षेत्र में पिछड़ने के आदी नहीं हैं। हमें हर मौके पर चौका मारने की आदत है। भ्रष्टाचार, पर्यावरण असंतुलन एवं जनसंख्या विस्फोट जैसे मोर्चों पर अग्रणी रहने वाला देश भला डीज़ल-पेट्रोल जैसे अडानी से,, सॉरी; अदने से मुद्दे पर कैसे पिछड़ सकता था?

लिहाज़ा लोकतान्त्रिक व्यवस्था से चुनकर आई हमारी लोकतान्त्रिक सरकार ने यह तय किया कि हम अब अपनी गाड़ियों में वही ईंधन डालेंगे जो गडकरी बन्धुओं की व्यवसायिक भट्ठी से छनकर आता है। अब भैया चाहे तुम्हारी गाड़ी में जंग लगे, चाहे पैसों में लगे दीमक- तुम्हें थक-हारकर, मन मारकर अपनी गाड़ी में अमृत-काल का यही अमृत डालना पड़ेगा। देश के बड़े-बड़े उद्योगपति; पहाड़ों पर बुल्डोज़र चलाकर आखिर जो हरित क्रान्ति कर रहे हैं, उसकी भरपाई यूपी का मँगरूआ और एमपी का मुनीरवा नहीं करेगा, तो और कौन करेगा?

“जहाँ ब्राज़ील, अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों को E10 से E85 तक का सफर तय करने में चालीस साल लग गए, वहीं हमारे आदरणीय गडकरी जी ने देश को केवल 12 सालों की मशक्कत में इस मुकाम तक पहुँचा दिया।”

अरे साहब, मानते हम भी हैं कि सरकार को पर्यावरण की बहुत चिंता है और संभावित विश्वयुद्ध से पहले हमें आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। लेकिन आपकी आत्मनिर्भरता के चक्कर में हमारी गाड़ियाँ तो भरभराकर गिरी जा रही हैं। अभी समय है सरकार, चेतिये! वर्ना कहीं इस अंधाधुंध दौड़ के चक्कर में विकास का पहिया पटरी से उतर न जाए।

सत्ताधीश यदि पुत्रमोह में धृतराष्ट्र बनेंगे, तो भारत में महाभारत होनी निश्चित है।”

 

Leave a Comment

और पढ़ें